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5 अनलकी खिलाड़ी जिन्हें सेलेक्टर्स ने किया इग्नोर, एक का 50 से ज्यादा एवरेज

5 अनलकी खिलाड़ी जिन्हें सेलेक्टर्स ने किया इग्नोर, एक का 50 से ज्यादा एवरेज

भारतीय क्रिकेट टीम के न्यूजीलैंड दौरे 2026 के लिए घोषित वनडे स्क्वाड में युवाओं को मौका मिला है, लेकिन कई अनुभवी खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया गया है। बीसीसीआई की चयन समिति ने इस बार कुछ बड़े नामों को वनडे टीम में जगह नहीं दी, जो फैंस और एक्सपर्ट्स के लिए चौंकाने वाला है।

अनुभवी गेंदबाजों की गैरमौजूदगी

भुवनेश्वर कुमार, जो अपने स्विंग गेंदबाजी के लिए पहचाने जाते हैं, लंबे समय से वनडे टीम से बाहर हैं। हालांकि टी20 फॉर्मेट में उनका वापसी हो चुकी है, वनडे में अभी वापसी के संकेत नहीं मिले हैं। विशेष रूप से न्यूजीलैंड की मददगार पिचों के लिए भुवी का अनुभव टीम को बल दे सकता था।

मोहम्मद शमी, भारतीय तेज गेंदबाजी के मुख्य स्तंभ, जिन्हें इस दौरे के वनडे दल से बाहर रखा गया है। घरेलू प्रदर्शन बेहतर होने के बावजूद भी चयनकर्ताओं ने उन्हें किसी भी फॉर्मेट में मौका नहीं दिया। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और गेंद से विकेट निकालने की क्षमता टीम के लिए लाभकारी हो सकती थी।

कहानी अन्य प्रमुख खिलाड़ियों की

ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा का न होना टीम के मध्यक्रम और स्पिन संतुलन को प्रभावित करेगा। 190 से अधिक वनडे मैच खेलने वाले जडेजा ने गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग में अपनी काबिलियत साबित की है। उन्हें टीम से बाहर रखना युवा ऑलराउंडरों पर बड़ा दांव है।

संजू सैमसन का वनडे टीम में चयन न हो पाना भी सभी के लिए हैरानी की बात है। उनके 50 से अधिक के एवरेज और मध्यक्रम में तेज रन बनाने की क्षमता के बावजूद उन्हें टीम में नहीं जगह मिली, जो टीम की रणनीति पर सवाल उठाता है।

यशस्वी जायसवाल को भी वनडे टीम में शामिल नहीं किया गया। ओपनिंग में संभावित विकल्प के रूप में वे टीम के संतुलन के लिए उपयोगी हो सकते थे। उनकी जगह ईशान किशन और रुतुराज गायकवाड़ को मौका मिला है, जबकि यशस्वी को केवल टेस्ट टीम में रखा गया है।

इस चयन ने विश्लेषकों में चर्चा छेड़ दी है कि टीम को संतुलित और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण की जरूरत है। युवा प्रतिभाओं को मौका देना जरूरी है, लेकिन अनुभवी खिलाड़ियों का योगदान भी अहम माना जाना चाहिए।

न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में अनुभवी तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों की कमी टीम के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। इसके चलते टीम की रणनीति और प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि चयनकर्ताओं का यह फैसला लंबी अवधि में टीम की मजबूती के लिए सही साबित होगा, हालांकि वनडे फॉर्मेट में अनुभवी खिलाड़ियों की उपेक्षा कई सवाल भी खड़े कर रही है।

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