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राहुल गांधी की खुली बहस की मांग पर भाजपा का पलटवार, संसद से बाहर चर्चा को बताया संविधान का अपमान

नई दिल्ली, भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संसद के बाहर खुली बहस करने की राहुल गांधी की मांग को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि बाहर बहस की मांग करना संविधान की मूल भावना और मतदाताओं का अपमान है।

 

भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संसद में बहस के लिए तैयार होने की बात तो करते हैं, लेकिन जब सदन में प्रधानमंत्री या सरकार की ओर से महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब दिया जाता है, तब वह सदन में मौजूद नहीं रहते। त्रिवेदी ने वर्ष 2023 में केंद्र सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलना शुरू करते ही राहुल गांधी लोकसभा से चले गए थे।

त्रिवेदी ने मणिपुर के मुद्दे पर भी इसी तरह का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद देश के लोकतंत्र का सर्वोच्च चर्चा मंच है। संविधान निर्माताओं ने इसे इसलिए बनाया था ताकि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि देश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकें। ऐसे में विपक्ष के नेता की ओर से संसद के बजाय बाहर बहस की मांग करना उचित नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी को उन मतदाताओं का भी सम्मान करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर संसद भेजा है। पार्टी ने उन्हें विपक्षी गठबंधन की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक संसद की तरह एक प्रतीकात्मक बहस आयोजित करने की सलाह भी दी।

भाजपा की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी की बुधवार को पंजाब में आयोजित रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दोहराने के बाद आई। राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री के साथ सार्वजनिक बहस की मांग उठा रहे हैं।

इस मामले में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी राहुल गांधी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ बहस करने के लिए सड़क या सार्वजनिक स्थान के बजाय संसद सबसे उपयुक्त जगह है। उनके अनुसार, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का सदन ही राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने का लोकतांत्रिक मंच है।

हिमंत बिस्व सरमा के बयान पर असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा को केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने की आशंका है। गोगोई के मुताबिक, कांग्रेस सरकार आने पर सरमा के कथित अपराधों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले सामने आ सकते हैं।

इस तरह संसद में बहस के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है।

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