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बगलामुखी मंदिर की 200 करोड़ की जमीन सरकार की

Baglamukhi temple land

MP हाईकोर्ट ने फर्जी डिक्री रद्द की

मध्यप्रदेश के बगलामुखी मंदिर की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सुलझ गया है। यह जमीन लगभग 200 करोड़ रुपये की मानी जा रही थी और एक फर्जी डिक्री के माध्यम से इसे निजी व्यक्ति के नाम दर्ज करवा दिया गया था।

एमपी हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फर्जी डिक्री को शून्य घोषित कर दिया और स्पष्ट किया कि यह जमीन सरकार की संपत्ति है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह की अवैध दावेदारी को मंजूरी नहीं दी जा सकती।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट के फैसले से पहले मंदिर परिसर में किराए पर चल रहे कुछ दुकानदारों ने देर रात अपने सामान को उठाया और स्थान खाली किया। प्रशासन ने बताया कि उनका मकसद सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा करना था।

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि सरकारी संपत्ति पर किसी भी तरह की अवैध कब्जेदारी कानून के अनुसार तुरंत हटाई जाएगी। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन पर सरकारी हक़ कायम किया जाए और भविष्य में किसी भी फर्जी दावे को रोका जाए।

विवाद के दौरान यह भी सामने आया कि जमीन का वास्तविक मूल्य करीब 200 करोड़ रुपये है। मंदिर के आसपास कई दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान चलते हैं। अदालत के फैसले के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि सरकारी स्वामित्व सुरक्षित रहेगा और किसी भी निजी दावे को कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कानून के शासन के लिए महत्वपूर्ण है। अदालत ने यह संदेश दिया कि किसी भी तरह की फर्जी डिक्री या दस्तावेज़ों से सरकारी हक़ को हड़पना अपराध है और इसके लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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