मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने की घोषणा के साथ ही पहला प्रश्न यह उठा-अब कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

इस प्रश्न का सही उत्तर किसी के पास नहीं है, लेकिन, राजनीति के गलियारे में इसका उत्तर अलग ही अंदाज आसानी से मिल रहा है।

भाजपा के शायद ही ऐसे कोई विधायक, विधान पार्षद और संसद के दोनों सदनों के सदस्य हों, जिन्हें यह संदेश न मिला हो- बधाई हो, आपका नाम सबसे आगे चल रहा है।

यहां तक कि कई पूर्व विधायकों के नाम भी आ रहे हैं। सोशल मीडिया अपना कमाल अलग से दिखा रहा है। इस प्लेटफार्म पर जिला और विधानसभा स्तर पर भी मुख्यमंत्री तय किए जा रहे हैं।

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पद के गंभीर दावेदार बधाई मिलते ही माफी मांगने लगते हैं-ऐसा मत बोलिए। लोग पीछे लग जाएंगे।

यह स्थिति इस धारणा के कारण पैदा हुई कि भाजपा कभी किसी को कहीं से उठाकर कहीं बिठा देती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का उदाहरण दिया जा रहा है, जहां के मुख्यमंत्री पहली बार के विधायक हैं।

Vijay Sinha- Bachaul

(उपमुख्‍यमंत्री व‍िजय सिन्‍हा व पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल।)

एक जिले में कई ‘मुख्यमंत्री’

सोशल मीडिया पर एक ही जिले में कई नेताओं को मुख्यमंत्री बनने के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दी जा रही है। दरभंगा में इस प्लेटफाॅर्म पर पहली बार विधायक बनी मैथिली ठाकुर और पहली बार राज्यसभा में गईं धर्मशीला गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है।

इसके पड़ोसी मधुबनी जिले में तो भाजपा के पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल को मुख्यमंत्री बनाने के लिए अभियान चल रहा है।

क्यों? इसलिए कि उनकी छवि कट्टर हिन्दू की है। वह बने तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह बुलडोजर से काम करेंगे। पूर्व मंत्री और पांचवीं बार विधायक बने नीतीश मिश्रा को भी राज्य का भावी मुख्यमंत्री बताया जा रहा है।

महिला मुख्यमंत्री की हो रही चर्चा

बधाइयां जाति, लिंग और क्षेत्र के आधार पर भी दी जा रही हैं। महिला सशक्तीकरण की एनडीए की नीति के हवाले से पहली बार विधायक और मंत्री बनीं श्रेयसी सिंह और रमा निषाद की चर्चा हो रही है तो कई बार विधायक रहीं गायत्री देवी को बधाई देने वाले भी कम नहीं हैं।

उप मुख्यमंत्री रहीं रेणु देवी पीछे चल रही हैं। उत्तर यह कि वह दूसरी बार उप मुख्यमंत्री नहीं बन पाईं तो मुख्यमंत्री क्या बनेंगी?

Nitish and Rama

(नीतीश मिश्रा एवं रमा निषाद।)

कयासों में अति पिछड़े हैं आगे

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अति पिछड़े अति प्रिय हैं। सो, सोशल मीडिया पर इस कोण से भी चर्चा हो रही है कि अति पिछड़ों में सबसे मजबूत दावा किसका हो सकता है?

इस श्रेणी में विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. प्रेम कुमार और संजीव कुमार चौरसिया को सबसे अधिक बधाई मिल रही है। प्रेम कुमार नौंवी और चौरसिया तीसरी बार विधायक बने हैं।

पहली बार विधान पार्षद और सहकारिता मंत्री डाॅ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी को बधाई देने वाले भी कम नहीं हैं। ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि के हैं।

सवर्ण भी निराश नहीं

भाजपा कुछ भी कर सकती है-इस धारणा के कारण सवर्ण समाज भी निराश नहीं है। सोशल मीडिया पर इस कोटे से उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, सांसद राजीव प्रताप रूडी, जनार्दन सिंह सीग्रीवाल सहित कई अन्य नाम चल रहे हैं।

लेकिन, सारा आकलन इस प्रश्न के साथ कमजोर पड़ जाता है, क्या नीतीश कुमार भाजपा की ओर से दिए गए किसी भी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के लिए राजी हो जाएंगे?