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गौ सेवक नीशू के ‘धर्म युद्ध’ के ऐलान से मची हलचल: मृत गायों के लिए श्मशान घाट की मांग, जनप्रतिनिधियों के घरों के बाहर धरना देने की चेतावनी

गौ सेवक नीशू के ‘धर्म युद्ध’ के ऐलान से हड़कंप:मृत गायों के लिए श्मशान घाट की मांग, जनप्रतिनिधियों के घर के बाहर देंगे धरना

मुज़फ्फरनगर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, गौ सेवक नीशू ने मृत गायों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए विशेष श्मशान घाट और नमक सहित कफ़न की व्यवस्था की मांग करते हुए एक बड़ा आंदोलन शुरू किया है। नीशू ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो वे जिले के सभी जनप्रतिनिधियों के आवासों के बाहर निरंतर धरना देंगे।

नीशू ने अपनी घोषणा में यह भी कहा कि इस आंदोलन में केवल वर्तमान जनप्रतिनिधि ही नहीं बल्कि मंत्री, पूर्व मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, चेयरमैन और पूर्व चेयरमैन समेत जिले की प्रमुख राजनीतिक हस्तियां भी भाग लेंगी। उनका उद्देश्य मृत गौवंश के प्रति सम्मान और हिंदू आस्था की रक्षा करना है।

गौ सेवक नीशू ने यह संकल्प लिया है कि तब तक वे जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे और नंगे पांव रहकर इस आंदोलन को गति देंगे। पिछले एक सप्ताह से वे इसी संकल्प के साथ पैदल मार्च कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई हिंदू धर्म के सम्मान और गऊ माता के सम्मान की है।

उनकी मुख्य मांग है कि मुज़फ्फरनगर में मृत गायों के अंतिम संस्कार के लिए एक अलग, समर्पित श्मशान घाट का निर्माण किया जाए, जहाँ हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार हो सके। साथ ही नमक और कफ़न भी उपलब्ध रहेंगे ताकि मृत गौवंश का सम्मानपूर्वक संस्कार हो सके। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में गौवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, जिससे मृत्‍यु पशुओं का उचित सम्मान नहीं हो पाता।

नीशू ने स्थानीय प्रशासन और जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर मामले को देखे और शीघ्र ही स्थायी समाधान निकालें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो यह शांतिपूर्ण आंदोलन जल्द एक बड़े जन संग्राम का रूप ले सकता है, जो पूरे जिले में फैल जाएगा।

स्थानीय लोगों और प्रदेश के सामाजिक संगठनों ने नीशू के इस आंदोलन का समर्थन करते हुए मृत गौवंश के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया है। गौरतलब है कि गौ संरक्षण और सम्मान को लेकर पिछले कुछ महीनों में समाज में काफी आंदोलनों और चर्चाओं का दौर चला है, और मुज़फ्फरनगर का यह आंदोलन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रशासन अभी तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दे पाया है, लेकिन इलाके में बढ़ती जनाक्रोश को देखते हुए जल्द ही इस पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। इस आंदोलन की निगरानी सभी संबंधित विभाग कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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