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इथेनॉल का उपयोग सतत विमान ईंधन में कैसे होता है?

How is ethanol used in Sustainable Aviation Fuel?

सतत विमान ईंधन (Sustainable Aviation Fuel – SAF) के क्षेत्र में इथेनॉल की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। विमानन उद्योग में पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए नई तकनीकों और सामग्री की खोज जारी है। खास तौर पर, एटीजे (Alcohol-to-Jet) प्रक्रिया ने इथेनॉल को सीधे विमान के इंजन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन में बदलने का रास्ता खोल दिया है।

एटीजे प्रक्रिया की खासियत यह है कि यह कच्चे इथेनॉल को सीधे जेट इंजन में नहीं पहुंचाती, जिससे कई समस्याओं से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए, कच्चा इथेनॉल जल अवशोषित करता है, जिससे ईंधन की लाइनों में जाम, इंजन की शक्ति में कमी और तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। लेकिन एटीजे प्रक्रिया के माध्यम से यह जोखिम खत्म हो जाता है क्योंकि इसमें इथेनॉल को एक तरह के हाइड्रोकार्बन ईंधन में परिवर्तित किया जाता है जो जेट इंजन के अनुकूल है और नमी को अवशोषित नहीं करता।

यह तकनीक न केवल विमानन उद्योग में पारंपरिक जीवाश्म आधारित ईंधन पर निर्भरता कम करती है, बल्कि इससे कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है। इथेनॉल, जो आमतौर पर पशुपालन या फसल अवशेषों से बनाया जाता है, एक नवीकरणीय स्रोत है, जिससे यह पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल होता है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर इथेनॉल का उत्पादन रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एटीजे आधारित सतत विमान ईंधन का उपयोग बढ़ने से विमानन उद्योग में हरी क्रांति लाई जा सकती है। हालांकि अभी भी इसे बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए चुनौतियां मौजूद हैं, जैसे उत्पादन क्षमता बढ़ाना और लागत को किफायती बनाना, लेकिन निरंतर अनुसंधान और निवेश से जल्द ही यह संभव हो सकता है।

संक्षेप में, एटीजे प्रक्रिया के जरिए कच्चे इथेनॉल को हाइड्रोकार्बन में बदल कर जेट इंजन के लिए उपयुक्त ईंधन बनाना, विमानन क्षेत्र को पर्यावरण के प्रति जागरूक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल पर्यावरणीय लाभ देता है बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा देता है।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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