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उपभोक्ता खपत बनी आर्थिक विकास की रीढ़; जीडीपी विस्तार के लिए आवश्यक है पूर्वानुमानित समर्थन: वित्त मंत्री

Consumption sustaining growth; predictable support essential for GDP expansion: Finance Minister

नई दिल्ली। वित्त मंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र में तीसरे पक्ष के उत्पादों की बिक्री को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि बैंकर्स की समिति इस बात पर विचार कर रही है कि क्या बैंक केवल विशिष्ट वितरण समझौतों के तहत ही तीसरे पक्ष के उत्पाद बेचें या फिर खुले वास्तुकला (ओपन आर्किटेक्चर) की नीति अपनाई जाए।

वित्त मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि यह मुद्दा वर्तमान में बैंकिंग क्षेत्र में बहुत चर्चा का विषय है। पारंपरिक रूप से बैंक अपने उत्पादों को बेचते आए हैं, लेकिन तीसरे पक्ष के उत्पादों को शामिल करने से ग्राहक विकल्पों में वृद्धि हो सकती है। इस संदर्भ में समिति यह देख रही है कि किस प्रकार की नीति उपभोक्ताओं और बैंक दोनों के लिए फायदेमंद रहेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ओपन आर्किटेक्चर मॉडल में बैंकर्स अन्य कंपनियों के वित्तीय उत्पादों को भी अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा सकेंगे, जिससे उत्पादों की विविधता बढ़ेगी। वहीं, विशिष्ट वितरण समझौतों के तहत बैंक किसी विशेष उत्पाद या सेवा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि यह निर्णय वित्तीय समावेशन और ग्राहक संतुष्टि को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। इसके साथ ही, नियामक मानदंड और उपभोक्ता संरक्षण के पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा ताकि बाजार में प्रतिस्पर्धा उचित बनी रहे और ग्राहक को सर्वोत्तम उत्पाद मिल सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओपन आर्किटेक्चर अपनाई जाती है तो यह वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगा और ग्राहक के लिए अधिक पारदर्शिता तथा विकल्प उपलब्ध कराएगा। वहीं, विशिष्ट समझौतों से बैंक को अपने उत्पादों के बिक्री पर नियंत्रण प्राप्त रहता है, जिससे कुछ हद तक व्यावसायिक स्थिरता बनी रहती है।

बैंकर्स की समिति की बैठक अगले सप्ताह होने वाली है, जिसमें इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय की संभावना है। वित्त मंत्री ने सभी हितधारकों से कहा है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें ताकि एक संतुलित और व्यापक नीति बन सके।

देश के वित्तीय क्षेत्र में यह कदम नए बदलावों का संकेत माना जा रहा है, जो उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाएगा और आर्थिक विकास में योगदान देगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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