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ANRF शीर्ष 5-10% विश्वविद्यालयों से आगे शोध का विस्तार करेगा; भारत में मापनीय नवाचार की तरफ बदलाव को DST सेक्रेटरी ने बढ़ावा दिया

ANRF to expand research beyond top 5–10% universities; India pushes shift to scalable innovation: DST Secretary

भारत में अनुसंधान क्षेत्र में गुणवत्ता आधारित योगदान केवल पांच से दस प्रतिशत विश्वविद्यालयों तक सीमित है। यह असंतुलन देश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास के लिए एक चुनौती बना हुआ है। हाल ही में एक साक्षात्कार में प्रोफेसर अभय करंदिकार ने ANI के राष्ट्रीय अनुसंधान कोष (ANRF) और ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड के महत्व को रेखांकित किया।

प्रोफेसर करंदिकार ने बताया कि ANRF का उद्देश्य मात्र प्रमुख विश्वविद्यालयों तक सीमित शोध को सभी स्तरों पर विस्तारित करना है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधान क्षमता को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि इस पहल से उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग सशक्त होगा और अनुसंधान के बुनियादी अवसंरचना तक पहुँच में सुधार होगा।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत में फिलहाल प्रकाशित शोध के आधार पर मूल्यांकन की प्रक्रिया से हटकर अब पढ़ाई की व्यावहारिक उपयोगिता पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि शोध को केवल प्रकाशनों तक सीमित न रखते हुए, उसे व्यावसायिक और सामाजिक रूप से मापनीय नवाचारों में परिवर्तित किया जाए।

प्रोफेसर करंदिकार ने बताया कि ₹1 लाख करोड़ के RDI फंड का मुख्य लक्ष्य अनुसंधान को व्यावहारिकता की दिशा में ले जाना और विभिन्न उद्योगों की जरूरतों के अनुसार स्केलेबल समाधानों को बढ़ावा देना है। यह फंड न केवल वित्तीय सहायता देगा, बल्कि शोध कार्यों में दक्षता, गुणवत्ता और सामंजस्य स्थापित करेगा।

यह नई रणनीति भारत के अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन और समग्र विकास लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे देश के वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि ANRF और RDI फंड की योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया तो यह भारत में अनुसंधान के स्वरूप और दिशा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। प्रोफेसर करंदिकार का मानना है कि प्राथमिकता देने की अब आवश्यकता है उन शोधों को जो व्यापक समाज और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी हों, न कि केवल अकादमिक प्रकाशनों में सीमित रहें।

यह बदलाव छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा और भारत को तकनीकी उन्नति के क्षेत्र में एक नई पहचान देगा। रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक बनाकर और उद्योग-शिक्षा के सहयोग को बढ़ाकर देश में नवाचार की एक समृद्ध संस्कृति का निर्माण हो सकेगा।

डॉक्टर करंदिकार की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में भारत के अनुसंधान परिदृश्य में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे, जो देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति में सहायक होंगे। यह प्रयास भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय होगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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