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भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कल साइन होगा: 5 साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य, हर साल 5,000 भारतीयों को वर्क वीजा मिलेगा

भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कल साइन होगा:5 साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य; 5,000 भारतीयों को हर साल वर्क वीजा मिलेगा

नई दिल्ली, 26 अप्रैल: भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से चर्चित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) कल यानी सोमवार, 27 अप्रैल को दिल्ली में भारत मंडपम में साइन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के यूनियन मिनिस्टर ऑफ कॉमर्स पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के मंत्री ऑफ ट्रेड टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को व्यापक स्तर पर मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को लगभग दोगुना कर 5 बिलियन डॉलर तक पहुँचाना है। इसके अलावा, यह समझौता न्यूजीलैंड में भारतीय कंपनियों को ड्यूटी-फ्री एक्सपोर्ट की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की वहनीयता और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

न्यूजीलैंड इस समझौते के तहत आगामी 15 वर्षों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विसेज और इनोवेशन सेक्टर में 20 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगा। इस निवेश से भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे जो युवाओं के लिए उत्साहवर्धक साबित होंगे।

साथ ही, इस सौदे में भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है। न्यूजीलैंड हर साल 5,000 भारतीय विशेषज्ञों को अस्थायी रोजगार वीजा प्रदान करेगा। यह वीजा तीन वर्षों के लिए होगा और इसका लाभ आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन, कंस्ट्रक्शन, योग प्रशिक्षक, आयुष प्रैक्टिशनर्स, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षकों को मिलेगा। इससे भारतीय युवाओं को विदेशों में रोजगार पाने के अवसर बढ़ेंगे।

सरकार ने इस समझौते में घरेलू किसानों और MSME सेक्टर के हितों का खास ध्यान रखा है। संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, चीनी, प्याज, चने, मटर, मक्का, बादाम, मसाले और खाद्य तेल को इस समझौते से बाहर रखा गया है, जिससे स्थानीय उत्पादकों की सुरक्षा बनी रहे। इन उत्पादों पर पहले की तरह ही ड्यूटी लागू रहेगी ताकि घरेलू उत्पादन प्रभावित न हो।

इसके विपरीत, न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत एक्सपोर्ट आइटम्स पर व्यापार बाधाएं समाप्त कर दी जाएंगी या टैरिफ कम किया जाएगा। खासतौर पर ऊन, कोयला, लकड़ी और भेड़ के मांस को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। इसके अलावा, कीवीफ्रूट, सेब, वाइन, चेरी, एवोकैडो और शहद जैसे मुख्य निर्यात उत्पादों के लिए कोटा आधारित टैरिफ कटौती लागू होगी।

फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर के लिए भी यह बड़ा कदम होगा। भारतीय फार्मा और मेडिकल डिवाइस कंपनियों को न्यूजीलैंड में आसान बाजार मिलेगा क्योंकि न्यूजीलैंड की रेगुलेटरी अथॉरिटी अब भारत की GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) रिपोर्ट स्वीकार करेगी। इसका मतलब है उत्पादों की मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी तथा अनुपालन लागत में कमी आएगी।

यह समझौता न्यूजीलैंड के साथ भारत की तीसरी सबसे बड़ी ट्रेड डील होगी। इससे पहले भारत ने ऑस्ट्रेलिया और यूके के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर लिया है। इसके अलावा, भारत ने यूएई, मॉरीशस और ईएफटीए देशों के साथ भी व्यापक ट्रेड डील फाइनल की है। वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार लगभग 2.4 बिलियन डॉलर तक है, जिसे 5 बिलियन डॉलर के स्तर तक लेकर जाने की योजना है।

इस समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक सहयोग को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार यह द्विपक्षीय सहयोग क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा और वैश्विक बाजार में दोनों देशों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करेगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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