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विकास की बयार बहाने की आड़ में होगा विनाश का तांडव:बिड़ला कोल माइंस

विकास की बयार के बहाने होगा विनाश का तांडव
विक्रम बिड़ला माइंस में दर्जनों खामियां
“TMC”कर रही ओवर बर्डेन का काम

गोपालपुर/शहडोल –विनय मिश्रा की रिपोर्ट

 

बात जब भी पूंजीपतियों और उद्योगपतियों की होती है वहाँ आम आदमी से लेकर प्रशासन की पहुच न के बराबर हो जाती है बीते कुछ वर्षों से बिड़ला माइंस गोपालपुर के जंगलों में कोयला खोजने आई कोयले और जीवाश्म की इस खोज में न नुकुर और प्रशासनिक स्वीकृति के बीच वर्षो लग गए किंतु जब लगा तो हजारों पेड़ माइंस की बलि चढ़ गए और सैकड़ो आदिवासी गरीब आगामी दिनों में घर बिना मुहाल होंगे जिस क्षेत्र और दायरे में माइंस कोयला निकालने का काम करेगी वहां लगभग 50 के आसपास आदिवासी बस्ती है जिनके बिना मंजूरी के कोयला निकालने और उन्हें विस्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन से न केवल वन और प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान होगा, बल्कि उनके जीवन और स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
हाल ही में स्थानीय मजदूर संघर्ष समिति ने एक पंचायती रूप रेखा तैयार की थी जिनमे रोजगर से लेकर सुरक्षा के दर्जनों मुद्दे शामिल थे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि खनन के लिए हज़ारों पेड़ जंगल काट दिए गए इससे इलाके की जैव विविधता प्रभावित होगी और पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाएगा। पेड़ और वन्य जीवन के नष्ट होने से मिट्टी क्षरण और जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया तेज होगी। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव की प्राकृतिक सुंदरता भी इस खनन के कारण कम हो जाएगी।

मचेगा कोलाहल ध्वनि और वायु प्रदूषण से होगी असन्तुलन की स्थिति निर्मित

जाहिर है पृथ्वी के कई फिट खुदाई के बाद कोयले का जीवाश्म निकलेगा जो बिना मशीनरी तंत्र और विस्फोट के सम्भव नही है दिनभर होने वाली ब्लास्टिंग और विस्फोटों से गांवों में भारी ध्वनि प्रदूषण फैलेगा नाना प्रकार की बीमारियां निर्मित होगी,आसपास के लोगों का जीना मुहाल होगा, श्वसन और फेफड़ों में सिवाय धूल और कोयला के कुछ नही रहेगा इसी प्रकार विस्फोटों की आवाजें इतनी तेज होती हैं कि घरों में दरारें पड़ने काफी आसार होंगे आसपास के रहवासी दिनभर तनाव भरा जीवन का सामना करेगे। इसके अलावा, धूल और धुएँ के कारण हवा और पानी भी प्रदूषित हो रहा है।

सड़कों और ग्रामीण अवसंरचना का नुकसान

खनन क्षेत्र में भारी ट्रकों और मशीनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की हालत बिगड़ रही है। लोग बताते हैं कि पहले से ही टूटी हुई सड़कों पर यह भारी वाहन दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं।
युवाओं की बेरोजगारी चिंता का मुख्य कारण बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन परियोजना से उन्हें पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा, जबकि उनके खेत, जंगल और घर प्रत्यक्ष खतरे में हैं। कई लोगों ने बताया कि मशीनों की गड़गड़ाहट से उनके घरो में प्रभाव पड़ रहा है वे भय और असुरक्षा की स्थिति में जी रहे हैं।
इसी प्रकार से रहवासी इलाके के जल,जंगल और जमीन का विनाश जारी रहा, तो वह दिन दूर नही जब यहां मौसम का हाल बेहाल होगा और गर्मी का प्रकोप कर्क और विषुवती प्रदेशों जैसी होगी और ग्लोबल वार्मिग से जूझते जनजीवन में हर व्यक्ति अपंग।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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