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सोशल मीडिया का सुपरस्टार आरक्षक हुआ ‘निलंबित’”

सोशल मीडिया का सुपरस्टार आरक्षक हुआ ‘निलंबित’”

शहडोल।

सोशल मीडिया के दौर में रील का जमाना है और इस रील ने बहुत सारी घटनाओं और तथ्यों को रियल भी बना दिया है किंतु जब रियलिटी की बात हो और ईमानदार कर्मचारी रील की भेंट चढ़े तब सवाल तो बड़े महकमे से बनता है एक तरफ समाज को सजग करने वाले कर्मचारी सस्पेंसन की भेंट चढ़ रहे हैं वही दूसरी ओर रात भर ट्रैफिक की आड़ में रेत की डग्गी पकड़ने व रास्ते मे ही उनका सौदा करने वाले सिपहसालारों पर  पुलिस के बड़े महकमे की नजर नही जाती किन्तु ईमानदारी से लोगो को सजग करने वाले एक छोटे कर्मचारी पर साहब की नजर टेढ़ी पड़ गई।
वैसे तो जैतपुर, बुढ़ार और ब्यौहारी क्षेत्र में होने वाले दिन रात अवैध रेत उत्खनन और परिवहन किसी न किसी चौराहे तिराहे से तीसरी आँख को चीरते हुए जाती है पर शायद तब रात के अंधेरे में जिम्मेदारों की बत्ती गुल हो जाती है किंतु जो बत्ती सर्दी,गर्मी,बरसात में बिना छत के लोगो को सही राह दिखाने का कार्य करता है उसे सस्पेंसन से नवाजा जाता है और बेईमान किरदारों को यहां ईमानदारी का ताज पहनाया जाता है।”इस पर एक व्यंग्य है “रामचंद्र कह गये सिया से,ऐसा कलजुग आएगा,हंस चूगेगा दाना दुनका,हंस चूगेगा दाना दुनका,कव्वा मोती खाएगा” ॥

इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर जनता के प्रिय यातायात आरक्षक विवेकानंद तिवारी को सामान्य सेवा शर्तों के उल्लंघन और निजी लाभ अर्जित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।विवेकानंद तिवारी की लोकप्रियता और फॉलोअर्स की संख्या यह साबित करती है कि यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने में उनके प्रयासों को समाज ने सराहा। उनके वीडियो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने और समय-समय पर उन्हें विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया।

लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि उनके कार्य नियमों के विरुद्ध थे, तो प्रशासन इतने वर्षों तक क्यों मौन रहा? जब उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी, सम्मान मिल रहे थे और वीडियो खुले मंचों पर उपलब्ध थे, तब किसी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई?
विवेकानंद तिवारी कम से कम उन आरक्षकों से तो बेहतर ही दिखाई देते हैं जो चौराहों पर तैनात होने के बावजूद समय दुकानों में बिताते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा ही थी कि लोग उनके सामने खड़े होते ही यातायात नियमों का पालन करने लगते थे।
यानी, जनता जागरूक, समाज प्रसन्न और प्रशासन ‘निलंबित’। ऐसा लगता है कि यहां भी वही पुराना नियम चलता है काम अच्छा हो या बुरा, अगर कैमरा सामने है तो पाबंदी है।

नोट:कोर्ट के नियमों का अवमानना हम नही करते यह सिर्फ एक खबर और हमारे बीच आई लोगो की प्रतिक्रिया है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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