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भारत और ब्रिटेन के नये सामाजिक सुरक्षा समझौते से भारतीय कंपनियों और श्रमिकों को 500 मिलियन डॉलर की बचत

Revised social security pact with U.K. could save $500 million for Indian firms and workers

नई दिल्ली। दोतरफा व्यापार समझौते के कार्यान्वयन को अस्थायी रूप से रोकने वाले ब्रिटेन के हालिया स्टील टैरिफ्स की घोषणा के संबंध में भारत अपनी चिंताओं के समाधान से संतुष्ट है। सूत्रों के अनुसार, भारत का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत और समझौते से व्यापारिक बाधाएं दूर होंगी और यह सहमति आर्थिक सहयोग को मजबूती प्रदान करेगी।

भारत और यूके के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते के नवीनीकरण से भारतीय कंपनियों और श्रमिकों के लिए लगभग 500 मिलियन डॉलर की बचत होगी। यह करार उन कंकालों और प्रक्रियाओं को सुगम बनाता है जो दोनों देशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़े योगदानों को लेकर थे। नए संशोधन से दोनों पक्षों के हितों को बेहतर ढंग से संतुलित किया गया है।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि ब्रिटेन की इस पहल को भारत ने सकारात्मक संकेत के रूप में स्वीकार किया है। यह समझौता व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने और आपसी विश्वास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। साथ ही, इससे भारत-यूके के बीच औद्योगिक सहयोग में वृद्घि का भी मार्ग प्रशस्त होगा।

हालांकि, पिछले कुछ महीनों में ब्रिटेन की ओर से धातु उत्पादों पर अत्यधिक टैरिफ लगाने की घोषणा से भारतीय उद्योग जगत को चिंता हुई थी। यह कदम द्विपक्षीय व्यापार सौदे के असर को सीमित कर सकता था। परंतु, भारत की सतत वार्ता और संवाद के बाद ब्रिटेन ने अपनी नीतियों में संशोधन किया है, जिससे भारतीय पक्ष की मुख्य चिंताएं दूर हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई साझेदारी से ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्हें दोहरी कराधान और सामाजिक सुरक्षा योगदान से बचाया जा सकेगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय फर्मों को विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त होगा।

व्यापार के जानकारों ने बताया कि यह समझौता भारत के लिए वैश्विक आर्थिक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ब्रिटेन और भारत के बीच लंबे समय तक आर्थिक और सामाजिक समन्वय बढ़ेगा। यह भारत के आर्थिक विकास के एजेंडे के अनुकूल भी है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर खास ध्यान दिया जाता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह निरंतर विश्वसनीय और पारदर्शी व्यापारिक रिश्ते कायम रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस नए समझौते के लागू होने से उम्मीद की जा रही है कि भारत-यूके संबंधों में नई ऊर्जा का संचार होगा और दोनों देशों के बीच निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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