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व्याख्या | क्यों NMC 2027 से पीजी डिप्लोमा मेडिकल कोर्सेज़ को बंद कर रहा है

Explained | Why NMC is phasing out PG diploma medical courses from 2027

नई दिल्ली। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने हाल ही में मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि जो पीजी डिप्लोमा कोर्सेज़ ऑफर कर रहे हैं, वे अपने सीटों को एमडी/एमएस ब्रॉड-स्पेशलिटी डिग्री सीटों में कन्वर्ट करने के लिए आवेदन करें। यह निर्णय मेडिकल शिक्षा प्रणाली में एक बड़ी बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम है, जो करीब दो दशकों से चल रही नीति परिवर्तन प्रक्रिया का परिणाम है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा जारी निर्देश का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा के स्तर को और अधिक उच्च बनाए रखना है। एमडी और एमएस डिग्री को अधिक व्यापक और विशेषज्ञता पूर्ण कोर्स माना जाता है, जबकि पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम अपेक्षाकृत सीमित और संकुचित होते हैं। इस नीतिगत बदलाव से यह उम्मीद की जा रही है कि चिकित्सा स्नातकों को बेहतर और समष्टिगत विशेषज्ञ शिक्षा मिलेगी, जिससे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार आएगा।

यह फैसला 2027 से प्रभावी होगा, और इसके बाद से पीजी डिप्लोमा कोर्सेज़ की पेशकश करने वाले कॉलेजों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे इन कोर्सेस को पूर्ण एमडी/एमएस के पाठ्यक्रमों में परिवर्तित करें। इस पहल के तहत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान कोई नए पीजी डिप्लोमा कोर्स शुरू नहीं किए जाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम न केवल मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि चिकित्सा प्रशिक्षुओं को समान परीक्षा मानकों और उच्च मानदंडों के अनुसार तैयार करेगा। इसके साथ ही, इससे विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या में भी वृद्धि होगी, जो देश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक होगी।

वर्षों से चली आ रही इस नीति में बदलाव का कारण यह भी है कि पीजी डिप्लोमा धारकों की विशेषज्ञता और ग्रेजुएशन के बाद के अवसरों में सीमाएं थीं, जो कई बार चिकित्सकीय क्षेत्रों में उनकी भूमिका को प्रभावित करती थीं। इस बदलाव से उन चिकित्सकों को भी लाभ होगा जो पूर्ण एमडी/एमएस डिग्री प्राप्त कर अपने कैरियर को और बेहतर दिशा देना चाहते हैं।

मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कॉलेजों पर इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान दिलाया है। कई कॉलेजों को पाठ्यक्रम संशोधन, शिक्षण स्टाफ और बुनियादी ढांचे के सुधार की आवश्यकता होगी, जिससे वे एमडी/एमएस के मानकों को पूरा कर सकें। इसके लिए आयोग ने उचित समय और संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया है।

इस नीति के लागू होने के बाद, भारतीय चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है, जो डॉक्टरों को और अधिक योग्य, दक्ष और विशेषज्ञ बनाएगा, और अंततः पूरे देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाएगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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