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देखें: भारत कैसे करता है पवन ऊर्जा का उपयोग और किन चुनौतियों का सामना कर रहा है | द स्कोप

Watch: How India uses wind energy — and what it is struggling with | The Scope

पश्चिमी देशों में तेजी से बढ़ रही हरित ऊर्जा क्रांति के बीच, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह संक्रमण आसान नहीं है। इस रिपोर्ट में, हम ‘टू-स्पीड ट्रांजिशन’ की अवधारणा को समझेंगे और देखेंगे कि कैसे दुनिया के सबसे गरीब देश उजली, स्वच्छ ऊर्जा की दौड़ में पीछे रह सकते हैं। साथ ही, भारत की भूमिका और संभावनाओं पर भी गहराई से नजर डालेंगे।

टू-स्पीड ट्रांजिशन का मतलब है कि हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण की दो अलग-अलग गति होती हैं – विकसित देशों में यह तेजी से हो रहा है, जबकि विकासशील देशों में कई आर्थिक, तकनीकी और नीतिगत बाधाओं के कारण धीमा। इससे एक ओर जहां वैश्विक तापमान घटाने की कोशिशें प्रभावित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब देशों की अर्थव्यवस्थाएँ पीछे छूट सकती हैं।

भारत, जो कि विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक है, अब न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी बनने की कोशिश भी कर रहा है। पवन ऊर्जा में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिनमें महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य प्रमुख हैं। पिछले दशक में पवन ऊर्जा उत्पादन में सौगुनी वृद्धि हुई है।

फिर भी चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या पवन पार्कों के लिए भूमि उपलब्धता, नेटवर्क कनेक्टिविटी और वित्तीय निवेश से जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ग्रिड की मजबूती और तकनीकी दक्षता में सुधार की जरूरत है। इसके अलावा, नीति निर्धारित करने में पारदर्शिता की कमी और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने में बाधाएँ भी हैं।

दुनिया के गरीब देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय प्रतिभा का उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ें। भारत में सरकारी योजनाएं जैसे राष्ट्रीय पवन मिशन, स्वच्छ ऊर्जा फंड और मुद्रा योजना इस दिशा में काम कर रहे हैं। ये पहलें भारत को वैश्विक दक्षिण की एक अग्रणी ऊर्जा शक्ति बना सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत सफलतापूर्वक दोड़ में अपनी भूमिका निभाता है, तो अन्य विकासशील देशों के लिए एक मॉडल और मार्गदर्शन प्रस्तुत कर सकता है। इससे सिर्फ पर्यावरणीय लाभ ही नहीं, बल्कि आर्थिक समावेशन और सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो सकेगा।

निष्कर्षतः, पवन ऊर्जा में भारत की यात्रा उत्साहजनक है, पर इसे सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए चुनौतियों को समझना, नीतिगत सुधार लाना और स्थानीय समुदायों को शामिल करना बेहद आवश्यक होगा। तब ही वैश्विक हरित क्रांति में भारत और समूचा वैश्विक दक्षिण सशक्त और न्यायसंगत भूमिका निभा पाएगा।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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