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राम मंदिर चढ़ावे चोरी के मामले में आठ आरोपियों के घर पुलिस ने की जबरदस्त छापेमारी, जांच जारी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आठ आरोपियों के घर पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी, साक्ष्य जुटाने में जुटी जांच टीमें

अयोध्या। राम मंदिर अयोध्या में चढ़ावे और नकदी की चोरी के संदिग्ध मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। पुलिस अधिकारियों ने इस कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य और दस्तावेज जुटाकर जांच को और मजबूत बनाना बताया है। मामले की गहनता देखते हुए पुलिस लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और सबूतों की पड़ताल में जुटी है।

एक साथ कई स्थानों पर दबिश

पुलिस की अलग-अलग टीमें रामधाम के स्वर्गद्वार मोहल्ला, कौशलपुरी, रुदौली तथा अन्य जगहों पर आरोपियों के आवासों पर पहुंचीं। जिनके घरों पर छापेमारी हुई, उनमें प्रमुख आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा समेत अन्य शामिल हैं। कुछ घर बंद पाए गए, जिन्हें खोलने में पुलिस को कड़ी मेहनत करनी पड़ी।

तलाशी के दौरान पुलिस ने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा अन्य संभावित सबूत जब्त किए। आरोपियों के परिवार के सदस्यों और आस-पास के लोगों से भी पूछताछ की गई ताकि मामले से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिल सके।

आर्थिकों की भी हो रही जांच

जांच एजेंसियां अब आरोपियों की आर्थिक स्थिति की भी पड़ताल कर रही हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि मंदिर की जिम्मेदारी मिलने से पहले और बाद उनका आर्थिक व्यवहार, संपत्ति या जीवनशैली में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं आया। इस संबंध में बैंक खातों, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड्स की भी समीक्षा संभव है।

रामजन्मभूमि थाना प्रभारी निरीक्षक सुमित श्रीवास्तव ने कहा कि जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

एसआईटी की रिपोर्ट के बाद बढ़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्राथमिक रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में कार्रवाई तेज हुई। उसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

नामजद आरोपियों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। एफआईआर के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में अब तक लगभग 80 लाख रुपये की नकदी भी बरामद हुई है, जिसका स्रोत और अन्य वित्तीय दस्तावेज फिलहाल जांच के दायरे में हैं।

विपक्षी पार्टियों ने उठाए सवाल

घटना को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने जांच की गति और समयसीमा पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि अगर प्रारंभिक स्तर पर एफआईआर दर्ज कर जल्द गिरफ्तारी की जाती तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना कम रह जाती।

कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि एसआईटी गठन और एफआईआर दर्ज होने में जो समय लगा, वह आरोपियों को संभावित साक्ष्य हटाने का मौका दे सकता था। इसके अलावा, सीधे न्यायिक प्रक्रिया में आरोपियों की पेशी और छापेमारी के प्रभाव पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

जांच पर नजर बनी हुई है

पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह से तथ्य और साक्ष्यों पर आधारित है और अगर जांच में किसी और की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब एसआईटी की विस्तारपूर्ण रिपोर्ट और आगे की जांच का इंतजार है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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