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जिस देश में MBBS किया, वहां का मेडिकल लाइसेंस जरूरी: NMC ने स्पष्ट किए नियम

जिस देश में MBBS किया, वहां का मेडिकल लाइसेंस जरूरी: NMC ने स्पष्ट किए नियम

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने विदेश में पढ़ाई करने वाले मेडिकल छात्रों के लिए एक अहम नियम स्पष्ट किया है। NMC ने कहा कि भारत में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) में बैठने के लिए जरूरी है कि जिसका भी मेडिकल स्टूडेंट ने विदेश में MBBS किया है, उसके पास उस देश का मेडिकल प्रैक्टिस करने का लाइसेंस होना चाहिए। यह नियम खासतौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करना चाहते हैं।

FMGE परीक्षा और लाइसेंसिंग के नियम

FMGE परीक्षा भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए एक अनिवार्य टेस्ट है। केवल वही विदेशी मेडिकल छात्र इस परीक्षा में बैठ सकते हैं जिन्होंने NEET क्वालिफाई किया हो और जिनकी पूरी मेडिकल पढ़ाई अंग्रेजी भाषा में हुई हो। इसके अलावा, विदेशी डिग्री के साथ-साथ अनिवार्य इंटर्नशिप और क्लिनिकल ट्रेनिंग भी पूरी करनी होती है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्टूडेंट के पास उस देश का मेडिकल लाइसेंस होना चाहिए जहां से उसने डिग्री हासिल की है।

यह नियम FMGE के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंशिएट रेगुलेशंस, 2021 के तहत लागू है। रेगुलेशन 4(b) में कहा गया है कि मेडिकल डिग्री के बाद कैंडिडेट को उस देश की मेडिकल रेगुलेटरी अथॉरिटी से रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य है ताकि वह चिकित्सा क्षेत्र में समान स्वतंत्रता से काम कर सके।

इसका मतलब यह है कि सिर्फ जूनियर डॉक्टर के तौर पर काम करना, जैसा कि जॉर्जिया में होता है, तब तक पर्याप्त नहीं है जब तक कि वह कार्य कानूनी तौर पर प्रैक्टिस करने की पूरी इजाजत न देता हो। यदि जॉर्जिया में पोस्टग्रेजुएट सर्टिफिकेशन के बाद ही प्रैक्टिस की अनुमति मिलती है, तो केवल जूनियर डॉक्टर की स्थिति ही पर्याप्त नहीं होगी।

छात्रों और कंसल्टेंट्स के लिए सावधानी की जरूरत

भावना नाम की एक स्टूडेंट ने PM ग्रीवेंस पोर्टल पर शिकायत की थी कि क्या जॉर्जिया में छह साल का MBBS कोर्स करने वाला छात्र भारत में FMGE में शामिल हो सकता है। उनका कहना था कि एजुकेशन कंसल्टेंट गलत जानकारी दे रहे हैं और छात्रों को भ्रमित कर रहे हैं कि सिर्फ कोर्स पूरा करने के बाद ही FMGE के लिए एलिजिबल हो जाएंगे।

भारतीय दूतावास ने भी इस मामले में चेतावनी जारी की है। आर्मेनिया के येरेवन में भारत के दूतावास ने सितंबर 2022 में जॉर्जिया के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक एडवाइजरी दी थी जिसमें बताया गया था कि जूनियर डॉक्टर के रूप में काम करना स्वतंत्र प्रैक्टिस के बराबर नहीं है। स्वतंत्र डॉक्टर बनने के लिए स्थानीय भाषा में परीक्षा पास करनी होगी और पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग करनी होगी।

रेगुलेशन 4(b) लागू होने के बाद कई कंसल्टेंट्स और छात्र भ्रमित हैं कि किन देशों में पूर्ण मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति तुरंत मिलती है। कुछ कंसल्टेंट गलत जानकारी दे रहे हैं जो कि इस नियम के खिलाफ हो सकती है। इस नियम के बाद, 30,000 से 40,000 भारतीय छात्रों ने जॉर्जिया के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया लेकिन कई छात्रों को इस नियम की समझ नहीं है।

एक कंसल्टेंट का कहना है कि जिन छात्रों ने कोर्स पूरा किया है, उन्हें जब वापस आना होगा तो असलियत का पता चलेगा। उन्होंने NMC और भारतीय दूतावास से अपील की है कि वे जॉर्जिया में MBBS करने वाले हजारों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सटीक और स्पष्ट एडवाइजरी जारी करें।

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