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किरण रिजिजू का प्रशांत भूषण पर बड़ा हमला, वीडियो शेयर कर लगाया कश्मीर अलग कराने का आरोप

किरण रिजिजू का प्रशांत भूषण पर बड़ा हमला, वीडियो शेयर कर लगाया कश्मीर अलग कराने का आरोप

नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें देश को तोड़ने और कश्मीर को भारत से अलग करने का समर्थक बताया है। रिजिजू ने इस आरोप को एक वीडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर काफी चर्चा में ला दिया है।

केंद्र सरकार के मंत्री का कड़ा रुख

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें प्रशांत भूषण की 2011 की टिप्पणी शामिल है। उस वक्त भूषण ने कहा था कि कश्मीर में हालात को सामान्य करने के लिए आर्मी को वहां से हटाना चाहिए और AFSPA कानून को खत्म करना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि अगर जनता अलगाव चाहती है तो जनमत संग्रह कराया जाए। यह बयान सरकार के रुख के खिलाफ माना गया।

रिजिजू ने फेसबुक पर स्पष्ट किया कि यह लड़ाई भारत-विरोधी ताकतों और देशभक्तों के बीच है। उन्होंने कहा कि देश को तोड़ने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री का यह बयान प्रशांत भूषण के विचारों के प्रति सरकार की सख्त नीति को दर्शाता है।

प्रशांत भूषण के हाल के बयान

शेयर किए गए वीडियो के दूसरे भाग में प्रशांत भूषण एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह रहे हैं कि सत्ता परिवर्तन जरूर होगा और वे चाहते हैं कि शासन व्यवस्था बदले। उन्होंने इसके लिए खुलकर पक्ष लिया। उनके इस बयान को कई राजनीतिक दलों और अधिकारियों ने विवादित माना है।

भूषण का यह समर्थन आमतौर पर विपक्षी पार्टियों के नजरिए से मेल खाता है, जबकि केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने इसे देश की अखंडता के खिलाफ बताया है। सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर यह बहस तीव्र हो रही है।

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि भारत एक संप्रभु देश है और कोई भी तत्व उससे अलगाव की मांग नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि प्रशांत जैसे बयानों से देश की एकता को खतरा पहुंचता है। इसलिए इन बातों का सख्ती से विरोध किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी इस मामले ने काफी हलचल मचा दी है। कुछ लोग प्रशांत के उनके पुराने और नए बयानों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं अधिकतर लोग रिजिजू के राष्ट्रवाद को लेकर खड़े हुए हैं। यह विवाद आगामी दिनों में और भी जोर पकड़ेगा।

इस पूरे विवाद में कश्मीर मुद्दा फिर से गरमाया हुआ है। प्रशांत के 2011 के बयान और नई राजनीतिक अभिव्यक्तियों के बीच देशव्यापी बहस छिड़ गई है कि भारत की एकता कैसे सुरक्षित रखी जाए। सरकार की सक्रिय प्रतिक्रिया से साफ लग रहा है कि राज्य इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है।

कुल मिलाकर, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का आक्रमक रुख और प्रशांत भूषण की विवादास्पद टिप्पणियां भारतीय राजनीति में कश्मीर और सत्ता परिवर्तन के मुद्दे को फिर से ताजा कर रही हैं। इस बहस का असर आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर दिखेगा।

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