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2047 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर का केमिकल बाजार बनाने का लक्ष्य, भारत वैश्विक उत्पादन केंद्र बनने की तैयारी में

नई दिल्ली, भारत

भारत के केमिकल और पेट्रोकेमिकल उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार की योजना वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र का बाजार 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की है। वर्तमान में इस उद्योग का बाजार लगभग 220 अरब डॉलर का बताया गया है। इस विस्तार को देश की आर्थिक वृद्धि और विकसित भारत के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मुंबई में आयोजित इंडिया केम-2026 कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केमिकल और पेट्रोकेमिकल उद्योग में भारत की दीर्घकालिक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की पर्याप्त क्षमता है। इस क्षेत्र का विकास देश के विनिर्माण उद्योग को गति देने के साथ वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत कर सकता है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह क्षेत्र?

केमिकल और पेट्रोकेमिकल उद्योग देश के औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाकर इसे वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।

जेपी नड्डा के अनुसार, इस उद्योग का विस्तार 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान दे सकता है। इसके लिए दीर्घकालिक आर्थिक योजनाओं के साथ उद्योग की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत-जापान साझेदारी पर विशेष ध्यान

इंडिया केम-2026 में जापान भागीदार देश रहा। इस आयोजन के माध्यम से दोनों देशों के बीच केमिकल और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में मुख्य कार्यकारी अधिकारियों का मंच आयोजित किया गया। इसमें उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और भारत को केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल उत्पादन के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उपायों पर चर्चा हुई।

1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की योजना

वर्तमान में लगभग 220 अरब डॉलर के बाजार वाले इस क्षेत्र को 2047 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य उद्योग के बड़े विस्तार की ओर संकेत करता है।

भारत-जापान सहयोग, औद्योगिक क्षमता में वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती इस क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में इस उद्योग का प्रदर्शन भारत की व्यापक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिहाज से अहम रहेगा।

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