दिव्यकीर्ति सम्पादक-दीपक पाण्डेय, समाचार सम्पादक-विनय मिश्रा, मप्र के सभी जिलों में सम्वाददाता की आवश्यकता है। हमसे जुडने के लिए सम्पर्क करें….. नम्बर-7000181525,7000189640 या लाग इन करें www.divyakirti.com ,

नई दिल्ली, दिल्ली: खरगे के बयान पर सर्वेक्षण में उठे सवाल, 68% लोगों ने कहा- प्रधानमंत्री पद की गरिमा प्रभावित हुई

नई दिल्ली, दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर कराए गए एक सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने इसे प्रधानमंत्री पद की गरिमा से जुड़ा मुद्दा माना है। मैट्रिज न्यूज कम्युनिकेशंस एजेंसी के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 68 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इस टिप्पणी से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंची। वहीं, 54 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसे कांग्रेस की हताशा और वैचारिक कमजोरी से जोड़ा।

 

सर्वेक्षण में राजनीतिक बयान के सांस्कृतिक प्रभाव को लेकर भी सवाल सामने आए। एजेंसी के मुताबिक, 72 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि खरगे की टिप्पणी सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों के प्रति सम्मान की कमी दर्शाती है। हालांकि, ये आंकड़े सर्वेक्षण में शामिल लोगों की राय पर आधारित हैं और इन्हें देश की पूरी आबादी की सोच का प्रतिनिधि मानने से पहले सर्वेक्षण की पद्धति तथा नमूने की विस्तृत जानकारी देखना जरूरी है।

5,000 लोगों से ली गई राय

मैट्रिज न्यूज कम्युनिकेशंस के अनुसार, इस सर्वेक्षण में कुल 5,000 लोगों को शामिल किया गया। लोगों से 25 से 27 अक्टूबर के बीच कंप्यूटर आधारित टेलीफोन साक्षात्कार पद्धति के जरिए बातचीत की गई। इस पद्धति को सीएटीआई कहा जाता है।

एजेंसी ने सर्वेक्षण के आधार पर प्रधानमंत्री पद की गरिमा, कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति और सनातन संस्कृति के प्रति सम्मान से जुड़े सवालों पर प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाएं प्रस्तुत कीं। इन निष्कर्षों में सबसे अधिक 72 प्रतिशत लोगों ने टिप्पणी को सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की कमी से जोड़ा, जबकि 68 प्रतिशत ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा प्रभावित होने की बात कही।

राजनीतिक बयानबाजी पर फिर चर्चा

सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक नेताओं की भाषा और बयानों को लेकर अक्सर बहस होती रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं, लेकिन उनके बयानों को लेकर जनता की प्रतिक्रिया भी राजनीतिक चर्चा को प्रभावित करती है।

इस सर्वेक्षण में 54 प्रतिशत प्रतिभागियों द्वारा टिप्पणी को कांग्रेस की हताशा और वैचारिक कमजोरी से जोड़ना भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह प्रतिक्रिया प्रतिभागियों की राजनीतिक धारणा को दर्शाती है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि कांग्रेस की वास्तविक राजनीतिक स्थिति या जनसमर्थन में कोई खास बदलाव आया है।

निष्कर्षों को समझने में सावधानी जरूरी

सर्वेक्षण के आंकड़े राजनीतिक बयान पर लोगों के नजरिये का एक संकेत देते हैं। लेकिन उपलब्ध विवरण में प्रतिभागियों के चयन, क्षेत्रवार प्रतिनिधित्व, सवालों की पूरी शब्दावली और त्रुटि-सीमा जैसी विस्तृत जानकारियां नहीं दी गई हैं। इन विवरणों के बिना सर्वेक्षण की विश्वसनीयता और देशव्यापी प्रतिनिधित्व का स्वतंत्र आकलन करना कठिन है।

इसलिए 68, 54 और 72 प्रतिशत के आंकड़ों को मैट्रिज न्यूज कम्युनिकेशंस द्वारा बताए गए सर्वेक्षण परिणामों के रूप में प्रस्तुत करना उचित होगा। इन आंकड़ों के आधार पर सभी नागरिकों की राय या किसी राजनीतिक दल के भविष्य के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

ये भी पढ़ें...

error: Content is protected !!