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नई दिल्ली, दिल्ली: एसिड अटैक रोकने में नाकामी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, केंद्र से मांगा जवाब; अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर

नई दिल्ली, दिल्ली: एसिड अटैक की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मौजूदा व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़े सवाल किए हैं। अदालत ने कहा कि केवल भावुक सर्कुलर जारी करने से एसिड की बिक्री और उसके दुरुपयोग को नहीं रोका जा सकता। यदि दिशानिर्देश बनाए जाने के बावजूद ऐसी घटनाएं जारी हैं, तो उनकी कमियों की पहचान कर प्रभावी कदम उठाने होंगे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ में न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह एसिड के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक उपायों का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करे।

राज्यों को निर्देश देना ही पर्याप्त नहीं

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिशानिर्देश जारी करने के बाद पूरी जिम्मेदारी राज्यों पर नहीं छोड़ी जा सकती। सरकार को यह भी पता करना चाहिए कि नियमों के बावजूद एसिड अटैक की घटनाएं क्यों हो रही हैं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि यदि जारी की गई नीति के बावजूद घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है, तो उसके क्रियान्वयन और व्यवस्था में मौजूद खामियों की समीक्षा आवश्यक है। अदालत ने संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया।

केंद्र ने मानी जमीनी स्तर पर कमी

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने अदालत को बताया कि एसिड की खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए राज्यों को विस्तृत दिशानिर्देश भेजे गए थे। राज्यों ने भी इस संबंध में नियम बनाए हैं, लेकिन उनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन कमजोर रहा है।

यह स्थिति इस सवाल को महत्वपूर्ण बनाती है कि नियमों के बावजूद एसिड की उपलब्धता और उसके दुरुपयोग को रोकने में कठिनाइयां क्यों बनी हुई हैं। अदालत की चिंता का केंद्र भी यही है कि सरकारी निर्देश वास्तविक कार्रवाई में कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।

हलफनामे में बताने होंगे जरूरी कदम

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बाजार में आसानी से उपलब्ध एसिड के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी कदमों की जानकारी मांगी है। सरकार को हलफनामे के माध्यम से यह बताना होगा कि इस समस्या से निपटने के लिए कौन से उपाय किए जा सकते हैं।

अदालत ने एसिड अटैक की बढ़ती और बर्बर घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए संकेत दिया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही और प्रभावी निगरानी महत्वपूर्ण हैं। केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

एसिड अटैक पीड़ितों को गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए एसिड की बिक्री पर नियंत्रण और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई अहम मानी जाती है। अब केंद्र सरकार के हलफनामे से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि वह मौजूदा व्यवस्था की कमियों को दूर करने और एसिड के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए क्या कदम प्रस्तावित करती है।

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