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यहाँ तुलसीदास कर रहे अनर्थ

राम के नाम पर रावण सा करतूत
बेह्मौरी।।

विनय मिश्रा…

बेमहौरी पँचायत में लगें हैं चोरी के बिल’
“तुलसीदास गफलत करे,जाँच कराए अभिषेक”
बोलिए तुलसीदास की …..

रामरचितमानस की रचना करने वाले तुलसीदास की ख्याति आज पूरे संसार मे फैली है उनकी कृति से आज मनुष्य के जीवन मे आध्यात्म और पवित्रता के गुण समावेश हो रहे हैं । गोसाईं की कृपा से रामचरितमानस लिखा गया ऐस माना जाता है उन्होंने साक्षात चित्रकूट के घाट में प्रभु राम का दर्शन किया था जहाँ तुलसीदास चंदन घिस रहे थे और स्वयं श्रीराम तिलक कर रहे थे।
किंतु कलयुग मे नाम के विपरीत लोगों के गुण होते हैं जहाँ पँचायत सचिव तुलसीदास अपने पँचायत में ऐसे-ऐसे खयानत कर रहे हैं जिनका कोई रता-पता नही और उसमें तिलक लगाने का काम जिम्मेदार कर रहे हैं और अभिषेक इनकी जाँच कराने पर आतुर हैं।
पूर्व में जनपद सदस्य अभिषेक तुलसीदास की काली करतूतों की जाँच के लिए जनपद सीईओ को आवेदन लिखा था जिस पर जाँच के आदेश हुए थे किंतु जाँच की कार्यवाही और परिणाम आज भी लम्बित है।
इन बिंदुओं की जाँच की माँग हुई थी कार्यवाही और परिणाम लम्बित…

◆गरफदिया आंगनबाड़ी सोख्ता गड्‌ढा सोख्ता गड्‌ढ़ा की दीवाल 9″ इंच मोटा होना चाहिए. जबकि स्थल पर 4″ इंच का ही निर्माण पाया गया। गड्ढे में डाला गया मटेरियल ईट के टुकड़े एवं मिट्टी पाई गयी जो कि तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है।

◆नाडेप गरफदिया- गरफदिया में निर्मित नाडेप (कचरादान) के नींव में गिट्टी नहीं डाली गई है सीधे जुड़ाई कर दी गई है जो कि तकनीकी नियमानुसार नहीं है। दउआ कोल के घर के पास निर्मित हैण्डपम्प के पास सोख्ता गड्ढा निर्मित, सोख्ता गड्ढों में कवर नहीं लगाया गया है जिससे बच्चों एवं जनवरों के लिए खतरा हो सकता है, नियमानुसार सोख्ता में कवर लगाया जाना चाहिए।

◆गरफदिया प्राथमिक पाठशाला में निर्मित बाउण्ड्रीवाल- बाउण्ड्रीवाल के पिलर में 12 एमएम के स्टील का उपयोग किया जाना था, लेकिन स्थल पर 8 एमएम एवं 10 एमएम लोहा का उपयोग करना पाया गया, जो नियमानुसार नहीं है।

◆हाईस्कूल बेम्हौरी में निर्मित सोख्ता गड्ढा सोख्ता गड्ढा की दीवाल 9″ इंच मोटा होना चाहिए, जबकि 4″ इंच मोटी दीवाल बनाई गई है। गड्ढे में डाला गया मटेरियल ईट के टुकडे एवं मिट्टी पाई गयी जो कि तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। बेम्हौरी में नत्थू सरपंच के घर के पास सोख्ता गड्ढा सोख्ता गड्ढा की दीवाल 9″ इंच मोटा होना चाहिए, जबकि 4″ इंच मोटी दीवाल बनाई गई है। गड्ढे में डाला गया मटेरियल ईंट के टुकड़े एवं मिट्टी पाई गयी जो कि तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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