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सवारियों के लिए जानलेवा बने ओवरलोड बसें,किसी बड़ी घटना के बाद ही जागता है प्रशासन

 शहडोल-रीवा-सतना की सड़को पर काल का डेरा

विनय मिश्रा…

शहडोल जिले में आम जनता को बस में सफर करना इन दिनों ऐसा है जैसे ‘काँटो का सफर’ एक ओर रीवा शहडोल मार्ग का मरम्मत और निर्माणाधीन सड़क पर गड्ढे और इन्डुलेशन, राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। परिहवन कार्यालय में बैठे अफसर मार्गो पर चलने वाले बस की लापरवाही से या तो अंजान हैं या जानबूझकर इनके रवैये से महरूम हैं।
शहडोल से रीवा-कटनी,सतना और इलाहाबाद जाने वाले बसों में राहगीरों को सवारियों को भूँसा की तरह बसों में भरा जाता है जबकि इन बसों में सवारियों के अनुसार सीट रहता है किन्तु सीट के भरे होने पर बसों में सवारी ठूस-ठूसकर भरकर सफर करने वाले बसों की न ही कोई जाँच करता है और न ही सम्बंधित विभाग कोई ठोस कदम उठाता है हाँ यदा-कदा यातायात विभाग सीट-बेल्ट और हेलमेट जैसे उपकरणों का जाँच कर कोरमपूर्ती जरूर कर लेते हैं।

ओवरलोड बसों ने ली कई जान…

ज्ञात हो शहडोल-रीवा-सतना-इलाहाबाद चलने वाले बसें कई बार दुर्घटना का शिकार हुई हैं किंतु बस मालिक और विभाग ने इनसे कोई सबक नही ली कुछ दिनों तक शोर-शराबा होता है उसके बाद सब ठिठुकर चुप हो जाते हैं।बीते कुछ वर्ष पहले रीवा रोड में (सीधी)ओवरलोड बस अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरी थी जिसमे 50 के आसपास लोगों की जान गई थी। इस घटना से पूरा प्रदेश स्तब्ध था जिसमे स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह संज्ञान लेकर बस मालिक पर कार्यवाही किए थे समय बीतने पर पुनः बस मालिको का वही ढीला रवैया नजर आने लगा।

खड़े होने का भी वही किराया,बैठने का भी वही…..

शहडोल से सीमावर्ती राज्यों और जिले में चलने वाली बसों में सीट से ऊपर सवारियों को भरकर उन्हें सीट के बीचोबीच एक कतार में खड़े करके एक लंबी दूरी का सफर तय किया जाता है जबकि नियमतः सीट से इतर सवारियों को बस में बैठाना परिवहन नियमो के विपरीत है यही नही इन सवारियों से सीट का ही किराया वसूला जाता है सरकार ने 8-10 वर्ष बच्चों के लिए किराए का एक अलग मापदंड तय किया है किंतु इन बस मालिको ने इस कड़ी में बच्चों को भी जवान और बूढ़े की कतार में रखा है और उनसे भी पूरा किराया वसूला जाता है।
एक बात तो तय है सरकार हो या जिला प्रशासन या सम्बंधित विभाग, की नींद किसी बड़ी घटना (उमरिया,हरदा,बघवार बस पलटने)के बाद ही खुलती है ।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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