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निर्वाचन अवधि में भी स्थानान्तरण क्यों नही???

 

 

एक ही दप्तर में दशकों से जमे अफसर और कर्मचारी….
भोपाल।।शहडोल
विनय मिश्रा....

निर्वाचन आयोग ने स्थानान्तरण नीति तय किया है कि तीन वर्ष की अवधि पूर्ण होने के उपरांत एक ऐसा कर्मचारी या अधिकारी जिसने एक जिले के ही दप्तर में तीन वर्ष गुजार लिए है उनका स्थानान्तरण सरकार द्वारा तय किया गया है किन्तु विधानसभा चुनाव बीतने के बाद लोकसभा चुनाव होने को है और जिले में तकरीबन ऐसे सैकड़ो कर्मचारी,अधिकारी हैं जिनका स्थानान्तरण नही हुआ और वह एक ही जिले में ब्लाक दर ब्लाक स्थानान्तरण का जुगाड़ कर चांदी काट रहे हैं। हम अपने इस समाचार में उन सभी विभाग के एक कर्मचारी, अधिकारी के नाम और पद गिनाने में अक्षम हैं किंतु नवागत कलेक्टर और निर्वाचन अधिकारी को इस ओर निगाह डालने की जरूर आवश्यकता है ताकि आगामी लोकसभा चुनाव को ऐसे कर्मचारी,अधिकारी प्रभावित न कर सकें।
सरकार द्वारा
स्थानान्तरण के बाद भी जमे अफसर…

कुछ ऐसे विभाग और कर्मचारी हैं जो स्थानांतरण आदेश के एक साल बाद भी विभागों में जमे हुए हैं। सरकार ने इस आदेश पर समय-समय पर सर्कुलर जारी तो किया है किंतु संबंधित अफसरों को इस आदेश से मानो कानों में जू तक नही रेंगता।
सरकार के इस स्थानांतरण आदेश का उद्देश्य सरकार के काम में पारदर्शिता लाना है लेकिन कई विभागों में ऐसा नहीं होता। सरकार के आदेश की उन्हीं के अफसर अनदेखी कर रहे हैं। ऐसा अक्सर दो कारणों से होता है। यदि सरकार के तबादला आदेश के बाद कोई अधिकारी कोर्ट से स्टे नहीं लिया है तब भी वह अपने अपने पद पर जमा है। इसका सीधा सा मतलब यही होता है उसने अपने उच्च अधिकारी से सेटिंग कर ली है। इसी वजह से वह विभाग से रिलीव नहीं हो रहा है। दूसरा यह होता है कि वह रिलीव तो हो गया लेकिन तबादला के बाद तय जगह पर उसने ज्वाइनिंग नहीं ली।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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