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भूलकर भी न कूदें गोविन्दगढ़ के इस “कुंड”में ,भूतिया या कोई रहस्य

गोविंदगढ़ का यह ‘कुंड’ क्या भूतिया है भूलकर भी न लगाएँ छलांग

रीवा।।

रीवा में शहर से 20 किमी दूर गोविंदगढ़ नाम का कस्बा है। यहाँ में खंदो माता का मंदिर है, जो न केवल एक धार्मिक स्थान है, बल्कि इसे टूरिस्ट स्पॉट के रूप में भी जाना जाता है । खंदो में खूबसूरत झरने हैं, बड़ी-बड़ी चट्टानें और प्राकृतिक जलस्रोत भी हैं। इसी मंदिर के पास कई छोटे-छोटे जलकुंड हैं, जो दिखने खूबसूरत हैं तो हैं, पर जानलेवा भी हैं माना जाता है कि इस कुंड पर तैरने वाले लोग अचानक गायब हो जाते हैं और उनका शव भी नही मिलता इसके बाद भी लोग यहाँ नहाने के लिए मौत को दावत देते हैं।

इस कुंड के बाहर एक बड़ा चेतावनी बोर्ड लगा है, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि कुंड में न उतरें उसके बाद भी लोग कुंड में चट्टानों से छलांग लगाकर तैरते हैं । कई बार छलांग के बाद उनका शव पानी मे गोता ही लगाता रहता है और वापस नही आते।
स्थानीय लोग बताते हैं कि खंदो कुंड में अक्सर लोगों की मौत होती रहती है। यह उतना गहरा नहीं है, फिर भी बड़े-बड़े तैराक यहां डूबकर मर जाते हैं. बताया जाता है कि इन कुंडों की गहराई 4 फीट से लेकर 8 फीट तक हो सकती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खंदो कुंड में उन मरे हुए लोगों की आत्माएं रहती हैं, जो जिंदा लोगों खींच लेती हैं और तब तक ऊपर नहीं आने देती जब तक उनकी मौत न हो जाए. हालांकि यह महज एक अंधविश्वास भी हो सकता है।

लोगों का मानना है कि पूरा खंदो पहाड़ की चट्टानों से बना हुआ है. यहां जगह-जगह पानी के स्त्रोत हैं और पानी जमीन के अंदर से निकलता है. बारिश के मौसम में तो पूरा खंदो पानी से भर जाता है. जहां-जहां प्राकृतिक जलधारा होती है, वहां निरंतर पानी के बहाव जमीन कटने लगती है. चट्टानों में भी गड्ढे हो जाते हैं. पानी के प्रवाह से गुफाएं तक बन जाती हैं. यह एक-दो साल में नहीं, बल्कि लाखों-हजारों सालों की प्रक्रिया होती है. ‘पानी अपना रास्ता खुद बना लेता है’, चाहे वह चट्टान को काटना हो या धरती में बड़े-बड़े कुंडों का निर्माण करना.

यह कुंड आज से 100-200 साल पुराने नहीं, बल्कि लाखों वर्ष पुराने हो सकते हैं कुंडों
बल्कि लाखों वर्ष पुराने हो सकते हैं. कुंडों के अंदर भी पानी के बहाव से कटी हुई दरारें हैं। कहीं-कहीं बहुत गहरे छेद भी हैं। ऊपर से भले ही स्विमिंग पूल जैसे लगें, लेकिन इनके अंदर कई दरारें, बड़े-बड़े छेद होते हैं. जो कोई कुंड में अधिक उछल-कूद मचाता है या ऊंची जगह से छलांग लगाता है, उसका पैर इन्हीं दरारों में फंस जाता है और वह खुद को बाहर नहीं निकाल पाता।कई लोग कुंड के अंदर बड़े गड्ढों में समा जाते हैं और पानी के साथ बहते हुए जमीन के अंदर चले जाते हैं।ऐसे लोगों का शव भी नहीं मिलता। अब इसका मुख्य कारण क्या है आप ही जानें पर इस मनोरंजक स्थल का लुत्फ जरूर उठाएँ।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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