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विवादों से घिरी मंडल अध्यक्ष की ताजपोशी, अब तक तय नही हो पाए मंडल अध्यक्ष

विवादों सी घिरी मंडल अध्यक्ष की ताजपोशी, अब तक तय नही हो पाए मंडल अध्यक्ष
शहडोल।।( विनय मिश्रा की कलम से)
क्या खूब कहा किसी शायर ने कि “कोई मुझसे पूँछे मेरे दिल का हाल ए बयाँ कमबख्त जितना धड़कता है उतनी ही बेचैनी होती है “इस रेख्ता का मतलब है कि उन चेहरों से पूँछो की उनके मन मे क्या गुजर रहा है जिन्होंने भाजपा मंडल अध्यक्ष बनने के सपने संजोए थे।जिस ताजपोशी को करीब दो माह पूर्व सम्पन्न हो जाना था दरअसल वह आज भी किसी अधूरे सपने की तरह अधूरा है।वैसे मण्डल अध्यक्ष और जिल्ध्यक्षों के चयन में जो लीपापोती हुई है यह लाइव प्रसारण पार्टी के किसी नेता से छिपा नही है और उनके जहन मे टीस करती यह निर्णय उन्हें हर वक्त कचोटती है।जिन्होंने मण्डल अध्यक्ष के लिए सपने बुने थे उनका नाम सूची में दूर-दूर तक नही दिखा जबकि जिल्ध्यक्षों की सूची में अपना नाम व शक्ल ढूढने वाले पार्टी के वरिष्ठ व कनिष्ठ कर्मठ चेहरे खुद को तराशते ही रह गए किन्तु जौहरी ने उनकी परख तक नही की।
सोहागपुर,बुढ़ार, ब्यौहारी जैसे पीक मंडलो में अब तक मण्डल अध्यक्ष का मनोनयन नही हो पाया है हलाकि इसके पीछे कुछ ऐसे फैक्टर थे जिससे सेलेक्शन कमेटी भी दुविधा में थी, कुछ को नाम और पहुँच के फेर में मण्डल अध्यक्ष बना दिया गया तो कुछ इस फेर में बनते-बनते रह गए।गलियारों में चर्चा का विषय बना प्रदेश अध्यक्ष का पद,मण्डल अध्यक्ष के चयन में खलल डाल दिया हलाकि मण्डल अध्यक्षों के चयन में प्रदेश अध्यक्ष के चयन से दूर-दूर तक कोई नाता नही है यह तो जिलाध्यक्ष और स्थानीय विधायकों के रायशुमारी से संगठन के शीर्ष नेतृत्व से तय किए जा सकते हैं किन्तु अब तक यह हो न सका। मजबूरी में ही सही पर हमारा दायित्व तो बनता है कि पार्टी के शीर्ष स्तर के नेताओ समेत कार्यकत्ताओं को जगा दें कि अभी भी इन मंडलो में मण्डल अध्यक्ष की नियुक्ति होना बाँकी है।खैर अपने-अपने खास की फेर में पार्टी को अब तक मण्डल अध्यक्ष नही मिल पाए जाहिर है अभी कोई चुनाव है नही अन्यथा दरी-चटाई झंडा उठावाने के लिए यह निर्णय तत्काल प्रभाव से ले लिया जाता और इस कबीले का एक सरदार जरूर नियुक्त हो जाता।
फिलहाल हम तो यह कहेंगे…हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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