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2020 तक झुग्गियों में रहने वालों को मिलेगा मालिकाना हक, फरवरी में वितरित होंगे पट्टे

सरकार ने शहरी झुग्गी क्षेत्रों का सर्वे शुरू किया

राजस्व और नगरीय विकास विभाग ने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यभर में व्यापक सर्वे शुरू कर दिया है। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने 31 दिसंबर 2020 तक झुग्गियों में निवास किया है, उन्हें भूमि का पट्टा प्रदान करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सर्वे का अधिकांश हिस्सा तेजी से पूरा किया जा रहा है और फरवरी में पात्र निवासियों को पट्टों का वितरण शुरू हो जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य झुग्गी क्षेत्रों के निवासियों को आवास सुरक्षा देना और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से जोड़ना है। वर्षों से बिना किसी कानूनी दस्तावेज के रह रहे परिवारों को इस पहल से बड़ा राहत मिल सकती है। आमतौर पर इन इलाकों में लोगों को बार-बार विस्थापन और अतिक्रमण कार्रवाई का खतरा बना रहता था, लेकिन अब पट्टा मिलने से उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

सर्वे टीमों को झुग्गी बस्तियों में भेजकर वहां रहने वाले परिवारों की पहचान, घरों की गिनती और निवास की अवधि की पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पात्रता सत्यापन के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली कनेक्शन, स्थानीय गवाह और पुराने दस्तावेजों जैसी कई सूचनाओं को परखा जा रहा है।

विभाग का कहना है कि इस योजना के माध्यम से झुग्गियों के पुनर्विकास की प्रक्रिया भी आसान होगी। पट्टा मिलने के बाद निवासी सरकारी योजनाओं के तहत घर सुधार, पानी–बिजली कनेक्शन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे।

दूसरी ओर, कई स्थानीय संगठनों ने कहा है कि सर्वे में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए ताकि वास्तविक पात्र परिवारों को ही लाभ मिले। विभाग ने आश्वासन दिया है कि ऑनलाइन सूची भी सार्वजनिक की जाएगी ताकि लोग अपने आपत्तियाँ दर्ज कर सकें।

राज्य सरकार का दावा है कि यह अभियान शहरी गरीबों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा और फरवरी तक अधिकतर पात्र परिवारों को मालिकाना दस्तावेज मिल जाएंगे।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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