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कानूनी चेतावनी के बाद भी खेतों में ज़हर, सेहत पर मंडरा रहा गंभीर खतरा

Toxic Farming

पत्ते वाली सब्जियों में खतरनाक रसायन

हाईकोर्ट द्वारा स्पष्ट निर्देश और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद खेतों में जहरीले रसायनों का प्रयोग थमने का नाम नहीं ले रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर पत्ते वाली सब्जियों में अत्यधिक मात्रा में कीटनाशक और रसायन इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो सीधे आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इन सब्जियों को कई बार धोने के बाद भी इनमें मौजूद केमिकल पूरी तरह से निकल पाना लगभग नामुमकिन होता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पालक, मेथी, धनिया, सरसों, पत्ता गोभी जैसी पत्तेदार सब्जियों पर कीटनाशकों का असर सबसे ज्यादा होता है, क्योंकि ये रसायन सीधे पत्तों पर छिड़के जाते हैं और उनकी सतह में गहराई तक समा जाते हैं। यही सब्जियां रोज़मर्रा के भोजन का हिस्सा बनती हैं, जिससे लंबे समय तक इनके सेवन से शरीर में जहरीले तत्व धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं। इससे कैंसर, लीवर खराब होना, किडनी की बीमारी, त्वचा रोग और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

हाईकोर्ट ने जहरीले रसायनों के इस्तेमाल पर सख्ती दिखाते हुए संबंधित विभागों को निगरानी बढ़ाने और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर बेहद सीमित दिख रहा है। कई किसान अब भी अधिक पैदावार के लालच में प्रतिबंधित या तय मात्रा से अधिक कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोग चाहे कितनी भी सावधानी बरत लें, केवल पानी से धोने भर से सब्जियों में मौजूद रसायन पूरी तरह खत्म नहीं होते। वे सलाह देते हैं कि सब्जियों को कुछ समय नमक या सिरके के पानी में भिगोकर रखा जाए, फिर अच्छी तरह धोया जाए, ताकि जोखिम कुछ हद तक कम किया जा सके।

प्रशासन की ओर से भी निगरानी बढ़ाने और सैंपल जांच की बात कही जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खेत स्तर पर सख्त नियंत्रण नहीं होगा, तब तक आम जनता को इस “जहर की खेती” से पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जा सकता।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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