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शराब घोटाले पर भूपेश बघेल का बड़ा बयान, भाजपा पर साजिश रचने का आरोप।

चैतन्य बघेल को जमानत, छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद प्रदेश की राजनीति में सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है। इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोला है। भाजपा का आरोप है कि भूपेश बघेल ने अपने बेटे को राहत दिलाने के लिए राजनीतिक चाल चली, जबकि शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।


भाजपा का हमला: परिवारवाद और दोहरा रवैया

भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस का असली चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि जब बात भूपेश बघेल के बेटे की आई तो पूरा तंत्र सक्रिय हो गया, लेकिन कवासी लखमा के मामले में वही संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। भाजपा ने इसे कांग्रेस की परिवार-केंद्रित राजनीति करार देते हुए कहा कि पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी भेदभाव कर रही है।


भूपेश बघेल का पलटवार: ‘राजनीतिक साजिश हो रही है’

भाजपा के आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। बघेल ने साफ कहा कि अगर वह अपने बेटे को बचाना चाहते, तो उसे जेल जाना ही नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।


कवासी लखमा की सेहत पर बयान

सेंट्रल जेल रायपुर में कवासी लखमा से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल ने उनकी सेहत को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल लखमा की तबीयत स्थिर है, लेकिन पहले उन्हें सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी। इसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखकर मेडिकल जांच की मांग की थी। जांच के बाद लखमा को आवश्यक दवाइयां दी गईं। बघेल ने कहा कि लखमा को शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।


जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर रही है और खुद को कानून से ऊपर समझ रही है। बघेल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ईडी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन ईओडब्ल्यू अब तक रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई है, जिससे मामले में अनावश्यक देरी हो रही है।


प्रोडक्शन वारंट को बताया उत्पीड़न

भूपेश बघेल ने हाल ही में तीन और लोगों को प्रोडक्शन वारंट पर लिए जाने को भी उत्पीड़न की कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है ताकि संबंधित लोगों को ज्यादा से ज्यादा समय तक जेल में रखा जा सके। उनका आरोप है कि इन कदमों का उद्देश्य न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव बनाना है।


कोर्ट में देरी और एजेंसियों पर आरोप

पूर्व सीएम ने कहा कि यदि ईडी ने कवासी लखमा के मामले में समय पर कोर्ट के सामने जवाब पेश किया होता, तो 17 दिसंबर को ही फैसला आ सकता था। लेकिन जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिससे सुनवाई टलती रही। उन्होंने कहा कि कोर्ट को फैसला करना है, लेकिन जब जांच एजेंसियां जवाब नहीं देंगी, तो तारीख बढ़ती जाएगी और आरोपी को जेल में रहना पड़ेगा।


राजनीति बनाम कानून की लड़ाई

चैतन्य बघेल को मिली जमानत और कवासी लखमा का जेल में रहना अब केवल कानूनी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। कांग्रेस इसे भाजपा की बदले की राजनीति बता रही है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का उदाहरण बता रही है। इस टकराव ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को और अधिक तीखा बना दिया है।


निष्कर्ष

कुल मिलाकर, चैतन्य बघेल की जमानत ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं और दोनों एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करेगी, लेकिन फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।

Divya Kirti
Author: Divya Kirti

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