चीन की राजनीति और सेना (PLA) के भीतर आपसी कलह देखने को मिल रही है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग ने अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक, जनरल झांग यूक्सिया और जनरल लियू जेनली के खिलाफ ही जांच का आदेश दे दिया है।

सीएमसी को खोखला करके और अपने सबसे करीबी सहयोगियों को भी दरकिनार करके, शी चिनफिंग ने चीन की एकमात्र ऐसी पार्टी के भीतर वैकल्पिक शक्ति केंद्रों को समाप्त कर दिया है जिसने शीर्ष नेताओं को सफलतापूर्वक चुनौती दी है।

चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग द्वारा की जा रही यह कार्रवाई न सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ है, बल्कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर से ‘वैकल्पिक शक्ति केंद्रों’ को पूरी तरह खत्म करने का भी आखिरी प्रहार माना जा रहा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जनरल झांग यूक्सिया कोई सामान्य अधिकारी नहीं थे। वे न केवल वियतनाम युद्ध के अनुभवी योद्धा थे, बल्कि उनके पिता ने शी चिनपिंग के पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गृहयुद्ध का सामना किया था। लेकिन अब बताया जा रहा है कि जनरल झांग के पतन का कारण उनकी बढ़ती ताकत ही बनी।

क्योंकि, शी चिनफिंग की व्यवस्था में ‘वफादारी’ से ज्यादा ‘निर्भरता’ का महत्व है। झांग पर परमाणु लीक और रिश्वतखोरी के आरोपों के साथ-साथ “अध्यक्ष उत्तरदायित्व प्रणाली” के उल्लंघन का आरोप लगा है,जो सीधे तौर पर शी चिनफिंग के एकाधिकार को चुनौती देता है।

सेना पर नियंत्रण करना चाहते चिनफिंग

माओत्से तुंग ने कहा था कि “सत्ता बंदूक की नोक से निकलती है। चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग इसी सिद्धांत पर चलते हुए 2027 के अपने संभावित चौथे कार्यकाल और पीएलए के शताब्दी वर्ष से पहले सेना को पूरी तरह अपने कंट्रोल में करना चाहते हैं। इसके पीछे चिनफिंग की विदेश नीति और ताइवान पर कब्जे की महत्वाकांक्षा भी छिपी है।

अमेरिकी और ताइवानी अधिकारियों के अनुसार, चिनफिंग ने अपने सेना को अगले साल 2027 तक युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है, चिनफिंग ऐसी चाहते हैं कि जो पेशेवर होने के साथ-साथ वैचारिक रूप से उनके प्रति अटूट निष्ठा रखे।