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H-1B एक्सटेंशन में कड़ा बदलाव, अमेरिका में भारतीयों की नई चिंता

H-1B एक्सटेंशन में कड़ा बदलाव, अमेरिका में भारतीयों की नई चिंता

अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B वीजा एक्सटेंशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत पुराने नियम, जो वीजा एक्सटेंशन की मंजूरी देते समय पिछली मंजूरी को आधार मानते थे, को खत्म करने की तैयारी है। इससे भारतीय समेत अमेरिका में काम कर रहे H-1B वर्कर्स को ज्यादा जांच और दस्तावेजों की मांग का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार के प्रस्तावित नियम में क्या है बदलाव?

वर्तमान में, अगर H-1B वीजा की परिस्थितियां नहीं बदलतीं, तो USCIS अधिकारी एक्सटेंशन आवेदन पर पिछले फैसले के आधार पर निर्णय लेते हैं। लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार, हर एक्सटेंशन के मामले की फिर से पूरी जांच की जाएगी, चाहे हालात समान हों या नहीं। इससे कंपनियों को यह साबित करने की चुनौती बढ़ जाएगी कि कर्मचारी अभी भी वीजा की शर्तों पर खरे उतरते हैं।

DHS के अनुसार, पुराने नियम की वजह से जांच अधिकारियों के लिए संभावित धोखाधड़ी पकड़ना मुश्किल था। प्रस्तावित बदलाव से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सख्त बनेगी, जिससे H-1B वर्कर्स की जांच में कड़ाई आएगी। यह बदलाव अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

H-1B वर्कर्स और कंपनियों पर प्रभाव

यह बदलाव H-1B वर्कर्स के लिए वीजा एक्सटेंशन प्रक्रिया को कठिन करेगा। वे एक्सटेंशन के लिए अतिरिक्त दस्तावेज प्रदान करने के लिए बाध्य होंगे, जिससे आवेदन की समीक्षा में समय और मेहनत बढ़ेगी। DHS के आंकड़ों के मुताबिक, इससे हर साल करीब 6,044 अतिरिक्त RFE (Request for Evidence) जारी हो सकते हैं, जिससे कंपनियों पर लगभग 1.33 लाख डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा।

RFE मिलने से न केवल आवेदकों को अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ेंगे, बल्कि USCIS के कर्मचारियों का काम भी बढ़ जाएगा। यह प्रस्ताव फॉर्म I-129 पर लागू होगा, जो कई गैर-इमिग्रेंट वर्क वीजा आवेदन के लिए जरूरी होता है। फिलहाल इसे एक प्रस्ताव के रूप में रखा गया है और अंतिम रूप में लागू नहीं किया गया है।

DHS इस बदलाव पर जनता की राय 13 नवंबर 2026 तक ले रहा है। इसके बाद ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस प्रस्ताव के लागू होने से पहले H-1B वर्कर्स और नियोक्ताओं को अपने दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी जा रही है ताकि किसी भी अतिरिक्त जांच का सामना किया जा सके।

यह कदम अमेरिका की वीजा प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है, ताकि संभावित धोखाधड़ी और गड़बड़ियों को रोका जा सके। लेकिन इसका सीधा असर अमेरिकी इंडस्ट्री में काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स और उनके नियोक्ताओं पर पड़ेगा, जो अब और अधिक सावधानी रखेंगे।

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